फिर रूप बदलकर डरा रहा कोरोना, एक्‍सपर्ट्स से जानें कितनी टेंशन की बात

यूनाइटेड किंगडम (UK) और दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया स्‍ट्रेन फैलने की खबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नया स्‍ट्रेन आसानी से फैलता है। वायरस विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि ऐसा सच में है या नहीं। इससे वैक्‍सीन के लिए चिंता की कोई बात है या और गंभीर बीमारी फैलने का खतरा, यह भी क्लियर नहीं। जैसे-जैसे आबादी में कोई वायरस फैलता है, वह अपना रूप बदलता जाता है। कुछ ज्‍यादा तेजी से बदलते हैं, कुछ धीमे। कोविड-19 देने वाले वायरस के कई रूप, चीन में सालभर पहले दिखने के बाद से सामने आ चुके हैं। शनिवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नए स्‍ट्रेन की वजह से कई पाबंदियों की घोषणा कर दी। यूरोपियन यूनियन व दुनिया के कई अन्‍य देशों ने भी संक्रमण को रोकने के लिए फ्लाइट्स या तो बंद कर दी हैं या बेहद सीमित कर दी हैं। आखिर नया स्‍ट्रेन क्‍या है, इससे क्‍या खतरे हैं और अभी क्‍या स्थिति है, आइए एक्‍सपर्ट्स से समझते हैं।

New Coronavirus Strains Found In UK And South Africa: करीब साल भर पहले चीन में पहली बार नजर आने के बाद, कोविड-19 के कई रूप (स्‍ट्रेन) सामने आ चुके हैं। ताजा स्‍ट्रेन ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पाया गया है।

New Covid Strain: फिर रूप बदलकर डरा रहा कोरोना, एक्‍सपर्ट्स से जानिए कितनी टेंशन की है बात

यूनाइटेड किंगडम (UK) और दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया स्‍ट्रेन फैलने की खबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नया स्‍ट्रेन आसानी से फैलता है। वायरस विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि ऐसा सच में है या नहीं। इससे वैक्‍सीन के लिए चिंता की कोई बात है या और गंभीर बीमारी फैलने का खतरा, यह भी क्लियर नहीं। जैसे-जैसे आबादी में कोई वायरस फैलता है, वह अपना रूप बदलता जाता है। कुछ ज्‍यादा तेजी से बदलते हैं, कुछ धीमे। कोविड-19 देने वाले वायरस के कई रूप, चीन में सालभर पहले दिखने के बाद से सामने आ चुके हैं। शनिवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नए स्‍ट्रेन की वजह से कई पाबंदियों की घोषणा कर दी। यूरोपियन यूनियन व दुनिया के कई अन्‍य देशों ने भी संक्रमण को रोकने के लिए फ्लाइट्स या तो बंद कर दी हैं या बेहद सीमित कर दी हैं। आखिर नया स्‍ट्रेन क्‍या है, इससे क्‍या खतरे हैं और अभी क्‍या स्थिति है, आइए एक्‍सपर्ट्स से समझते हैं।

नए स्‍ट्रेन को लेकर हमें क्‍या पता है?
नए स्‍ट्रेन को लेकर हमें क्‍या पता है?

ब्रिटेन और अमेरिका के हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, नया स्‍ट्रेन बाकियों के मुकाबले जल्‍दी संक्रमित करता है लेकिन अभी इसके सबूत नहीं है कि ये ज्‍यादा घातक है। ब्रिटिश सरकार के मुख्‍य वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वलांस ने कहा कि स्‍ट्रेन ‘तेजी से फैलता है और प्रमुख वैरियंट बनता जा रहा है।’ दिसंबर में लंदन के भीतर 60% से ज्‍यादा इंन्‍फेक्‍शंस इसी स्‍ट्रेन से फैले। चिंता की एक बड़ी वजह यह है कि इस स्‍ट्रेन के कई म्‍यूटेशंस हैं- करीब दो दर्जन की पहचान हो चुकी है। कुछ म्‍यूटेशंस तो उस स्‍पाइक प्रोटीन पर हैं जिनका इस्‍तेमाल वायरस कोशिकाओं से जुड़ने और उन्‍हें संक्रमित करने के लिए करता है। जो वैक्‍सीन बनी हैं, वे स्‍पाइक को ही निशाना बनाती हैं।

कोरोना का नया स्‍ट्रेन कैसे बनता है?
कोरोना का नया स्‍ट्रेन कैसे बनता है?

वायरस अक्‍सर अपने जेनेटिक कोड में एक या दो लेटर के बदलाव से बदल जाते हैं। यह इवॉल्‍यूशन की बेहद सामान्‍य प्रक्रिया है। हल्‍का सा बदला हुआ स्‍टेन किसी एक देश या इलाके में बेहद आम हो सकता है क्‍योंकि वह वहीं बना या ‘सुपर स्‍प्रेडर’ इवेंट्स के जरिए फैला। ज्‍यादा टेंशन की बात तब होती है जब वायरस अपनी सतह के प्रोटीन्‍स में बदलाव करके म्‍यूटेट होता है क्‍योंकि फिर यह इम्‍युन सिस्‍टम या दवाओं से बच जाता है। न्‍यूज एजेंसी एपी के अनुसार, ‘नए सबूत’ बताते हैं कि शायद नए स्‍ट्रेन के साथ ऐसा होने लगा है।

और कौन-कौन से स्‍ट्रेन्‍स मिले हैं?
और कौन-कौन से स्‍ट्रेन्‍स मिले हैं?

स्‍वीडन के रिसर्चर्स को अप्रैल में एक वायरस मिला था जिसमें दो जेनेटिक बदलाव थे। वह स्‍ट्रेन दोगुना संक्रामक लग रहा था। उसके दुनियाभर में करीब 6,000 केस मिले हैं। अधिकतर डेनमार्क और इंग्‍लैंड में। उस स्‍ट्रेन के अब कई वैरिएशंस आ चुके हैं। साउथ अफ्रीका में नए नया स्‍ट्रेन मिला है जिसमें वही दो बदलाव हैं जो हम देख चुके हैं। यूके वाले में भी दो बदलाव हैं, स्‍पाइक प्रोटीन में 8 चेंजेस हैं। सितंबर में दक्षिणपूर्वी इंग्‍लैंड में मिला एक स्‍ट्रेन अबतक फैल रहा है।

पुराने स्‍ट्रेन के मरीजों को इन्फेक्‍शन होगा?
पुराने स्‍ट्रेन के मरीजों को इन्फेक्‍शन होगा?

अमेरिका के पूर्व फूड ऐंड ड्रग कमिश्‍नर स्‍कॉट गॉटलिब ने सीबीएस के साथ बातचीत में कहा क‍ि शायद ऐसा नहीं होगा। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज में वायरस पर रिसर्च करने वाले डॉ रवि गुप्‍ता भी इसकी संभावना को बेहद कम आंकते हैं।

क्‍या वैक्‍सीन का असर कम हो जाएगा?
क्‍या वैक्‍सीन का असर कम हो जाएगा?

अमेरिकी के भावी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन के नॉमिनी सर्जन जनरल विवेक मूर्ति ने रविवार को एनबीसी से कहा कि ‘यह मानने की कोई वजह नहीं है कि जो टीके बन चुके हैं वे इस वायरस पर असरदार नहीं होंगे।’ कई एक्‍सपर्ट्स ने कहा कि वैक्‍सीन सिर्फ स्‍पाइक प्रोटीन ही नहीं, कई तरह के रेस्‍पांस पैदा करती हैं। नया स्‍ट्रेन वैक्‍सीन का मुकाबला कर लेगा, इसकी संभावना कम है लेकिन इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

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