अब ईरान और तुर्की के बीच खिंची तलवार, वजह बना राष्ट्रपति एर्दोगन का 'बड़बोलापन'

तेहरान
ने के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन के हाल में दिए एक बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। तेहरान ने इस मामले में तुर्की के राजदूत को समन कर अपना विरोध पत्र भी सौंपा है। राष्ट्रपति एर्दोगन कुछ दिनों पहले पिछले महीने समाप्त हुए नागोर्नो-काराबाख युद्ध में मिली कथित जीत को मनाने अजरबैजान की राजधानी बाकू पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ईरान के अजरी अल्पसंख्यकों के बीच अलगाववाद को लेकर एक कविता पढ़ी थी।

एर्दोगन ने कविता पढ़ ईरान को उकसाया
एर्दोगन ने बाकू में सैन्य परेड के दौरान 19 वीं सदी में रूस और ईरान के बीच अजरबैजान की जमीन के बंटवारे के बारे में एक अजरी-ईरानी कविता को पढ़ा था। बस इसी बात पर ईरान ने गुस्से का इजहार करते हुए इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल करार दिया।

ईरान बोले- क्षेत्रीय अखंडता पर समझौता नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी वेबसाइट पर तुर्की के राजदूत को तलब करने को लेकर एक बयान भी जारी किया। इसमें कहा गया है कि तुर्की के राजदूत को सूचित किया गया था कि क्षेत्रीय दावों और विस्तारवादी साम्राज्यों का युग खत्म हो गया है। ईरान अपनी क्षेत्रीय अखंडता में किसी को भी मध्यस्थता करने की अनुमति नहीं देता है।

टर्किश जैसी भाषा बोलते हैं अजेरी लोग
ईरान में रहने वाले अजेरी मूल के लोग टर्किश जैसी भाषा बोलते हैं। इसमें ज्यादातर शिया इस्लाम को मानने वाले होते हैं। ईरान भी शिया बाहुल्य देश है, जबकि तुर्की सुन्नी इस्लामिक देश है। नागोर्नो-काराबाख युद्ध के दौरान तुर्की ने खुलकर अजरबैजान का साथ दिया। इस कारण युद्ध के दौरान आर्मीनिया की सेना को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा।

तुर्की कर रहा अजरबैजान का खुला समर्थन
नागोर्नो-काराबाख में हुई जीत के जश्न में बाकू में परेड का आयोजन किया गया था। इसमें एर्गोदान की मौजूदगी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। एर्दोगान ने लगातार अजरबैजान का समर्थन किया है। माना जाता है कि इसकी मदद से ही तुर्की क्षेत्र में अपनी ताकत बनाए रखना चाहता है। यहां तक कि परेड में तुर्की की कमांडो ब्रिगेड ने भी हिस्सा लिया और तुर्की के ड्रोन भी डिस्प्ले किए गए। अजरबैजान के राष्ट्रपति इलिहम अलियेव ने तुर्की को धन्यवाद भी दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *