
साल 2020 खगोलीय नजारों और दुर्लभ घटनाओं के लिहाज बेहद खास रहा और नए साल की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही होने जा रही है। नए साल के जश्न में पटाखे फोड़ने घर से निकल सके हों तो मायूस न हों क्योंकि पहले ही वीकेंड पर आसमान में आतिशबाजी नजर आने वाली है। हर साल 28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच होने वाले को उसके चरम पर 2 और 3 जनवरी के बीच देखा जा सकेगा।
क्यों खास है ये बारिश?
Quadrantid को अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के मुताबिक साल की सबसे खूबसूरत के तौर पर जाना जाता है। वजह है हर घंटे में 50 से 200 के बीच टूटते तारों का दिखना। आसमान साफ हो तो ये नजारा आराम से देखा जा सकता है। यही नहीं, आम उल्कापिंडों से अलग इनकी चमक और रंग काफी तेज होते हैं। ये आग के गोले जैसे दिखते हैं। जिन दो दिनों में ये अपने चरम पर होंगे उनके बीच भी 6 घंटे का वक्त ऐसा होगा जब ये सबसे ज्यादा दिखाई देंगे।
भारत में कब दिखेंगे?
भारत में इन्हें रविवार रात 8 बजे देखा जा सकेगा। हालांकि, सर्दी के मौसम में कोहरा होने की वजह से इन्हें देखना मुश्किल भी हो सकता है। वहीं, चांद की रोशनी भी इन्हें देखने में बाधा बन सकती है। उल्कापिंड को सबसे साफ-साफ आधी रात के बाद और सूर्योदय से पहले भोर में देखा जा सकता है जब आसमान में अंधेरा ज्यादा हो और आर्टिफिशल लाइट बंद हों। ऐसी बारिश है जिसके समय का सटीकता से दावा नहीं किया जा सका है।
कैसे देख सकते हैं टूटते तारे?
खगोलविदों के मुताबिक किसी भी उल्कापिंड को देखने के लिए सबसे जरूरी होता है आसपास की रोशनी का बेहद कम होना। शहरों में इमारतों और ट्रैफिक की रोशनी की वजह से आसमान कम अंधेरा दिखता है और टूटते सितारे देखना मुश्किल होता है। इसके लिए जरूरी है कि किसी ऐसी जगह पर रहें जहां आसपास कम से कम रोशनी हो। इस दौरान आसमान के ज्यादा से ज्यादा बड़े क्षेत्र पर नजरें घुमाते रहें। कुछ वक्त में जब आंखों का ध्यान आसमान के अंधेरे पर टिकने लगेगा, टूटते सितारे देखना आसान हो जाएगा।