Geminid Meteor Shower: चलते-चलते अब तक की सबसे शानदार टूटते तारों की बारिश दे जाएगा 2020, ऐसे देखें

साल 2020 को भले ही भयावह महामारी के लिए जाना जाए, ऐस्ट्रोनॉमर्स और अंतरिक्षिप्रेमियों के लिए यह साल बेहद खास रहा। एक से एक दुर्लभ खगोलीय घटनाओं के गवाह रहे इस साल का अंत भी बेहद खूबसूरत होने वाला है। माना जा रहा है कि Geminid Meteor Shower इस साल की सबसे भव्य तारों की बारिश होने वाली है। यहां जानते हैं कि आखिर क्यों ये बरसात बेहद खास है…Image Credit & Copyright Daniel López (El Cielo de Canarias)

Geminid Meteor Shower: साल 2020 का अंत बेहद खूबसूरत होने वाला है। साल का आखिरी Meteor Shower यानी टूटते तारों की बारिश सबसे शानदार होगी।

Geminid Meteor Shower: चलते-चलते अब तक की सबसे शानदार टूटते तारों की बारिश दे जाएगा 2020, ऐसे देखें

साल 2020 को भले ही भयावह महामारी के लिए जाना जाए, ऐस्ट्रोनॉमर्स और अंतरिक्षिप्रेमियों के लिए यह साल बेहद खास रहा। एक से एक दुर्लभ खगोलीय घटनाओं के गवाह रहे इस साल का अंत भी बेहद खूबसूरत होने वाला है। माना जा रहा है कि Geminid Meteor Shower इस साल की सबसे भव्य तारों की बारिश होने वाली है। यहां जानते हैं कि आखिर क्यों ये बरसात बेहद खास है…Image Credit & Copyright Daniel López (El Cielo de Canarias)

कहां से आते हैं?
कहां से आते हैं?

इस रविवार यानी 13 दिसंबर की रात Geminid Meteor Shower अपने चरम पर होगा। जैसा कि नाम से जाहिर है, ये उल्कापिंड Gemini, the Twins तारामंडल से आते हैं। रविवार की रात ये Castor नाम के सितारे की ओर से निकलेंगे और आसमान को रोशन करेंगे। Castor और Pollux को ही Twin यानी जुड़वां कहते हैं। Geminid Meteor Shower को अगस्त में गुजरे Perseid Meteor Shower से भी बेहतरीन माना जा रहा है।

क्यों खास हैं ये टूटते तारे?
क्यों खास हैं ये टूटते तारे?

सबसे खास बात यह है कि दूसरे टूटते तारों की बारिश से उलट, Geminids काफी नए हैं। बाकी सबके बारे में इतिहास में जानकारी कई सौ या हजारों साल पहले भी मिल जाती है जबकि Geminids के बारे में सबसे पुरानी जानकारी दिसंबर 1862 में मिली थी। ये उल्कापिंड हर साल दिखाई देते हैं और समय के साथ इनकी संख्या और चमक, दोनों तेज होते जा रहे हैं। (Image credit and copyright Jeff Dai)

आराम से दिखेंगे
आराम से दिखेंगे

ये आमतौर पर धरती के करीब से 22 मील प्रति सेकंड की रफ्तार से गुजरते है जिसे काफी धीमा माना जाता है। इसकी वजह से इन्हें दूसरे उल्कापिंडों की तुलना में काफी आराम से देखा जा सकता है। ये पीले, लाल, नारंगी, नीले और हरे रंग के भी हो सकते हैं। इस बार 13 दिसंबर को अपने चरम पर रहने के बाद ये 16 दिसंबर तक पूरी तरह गायब हो जाएंगे। खास बात यह है कि इस साल चांद की रोशनी आसमान में कम होगी, जिससे इन्हें देखना आसान हो जाएगा।

भारत में कब और कैसे दिखेगा?
भारत में कब और कैसे दिखेगा?

किसी भी उल्कापिंड को देखने के लिए सबसे जरूरी होता है आसपास की रोशनी का बेहद कम होना। शहरों में इमारतों और ट्रैफिक की रोशनी की वजह से आसमान कम अंधेरा दिखता है और टूटते सितारे देखना मुश्किल होता है। इसके लिए जरूरी है कि किसी ऐसी जगह पर रहें जहां आसपास कम से कम रोशनी हो। इसे देखने के लिए सबसे सही वक्त रात के दो वक्त के करीब है। इस दौरान आसमान के ज्यादा से ज्यादा बड़े क्षेत्र पर नजरें घुमाते रहें। कुछ वक्त में जब आंखों का ध्यान आसमान के अंधेरे पर टिकने लगेगा, टूटते सितारे देखना आसान हो जाएगा।

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